
Deepak Dua
Independent Film Journalist & Critic
Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.
A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra
All reviews by Deepak Dua

Rangeelee
Drama, Crime (Haryanvi)
अंधेरे में रोशनी बिखेरती ‘रंगीली’
Sun, July 27 2025
हरियाणवी सिनेमा का स्थापित नाम हैं संदीप शर्मा। अक्सर वह हिन्दी फिल्मों में भी दिख जाते हैं। अब वह अपनी ही लिखी कहानी पर यह हरियाणवी फिल्म ‘रंगीली’ लेकर आए हैं जो हरियाणवी कंटैंट के लोकप्रिय ओ.टी.टी. मंच ‘स्टेज’ पर रिलीज़ हुई है। हरियाणवी सिनेमा में हाल के बरसों में जो अच्छा कंटैंट आने लगा है उसके पीछे स्टेज जैसे ऐप का बड़ा हाथ है। यह फिल्म भी उसी अच्छे कंटैंट की एक मिसाल है। यह कहानी है एक विधुर पिता और उसके दो जवान बेटों की जो मेहनत-मज़दूरी करके अपना पेट पालते हैं। एक लड़की को बलात्कारी से बचाते हुए दोनों बेटे अंधे हो जाते हैं। लेकिन न तो पिता हार मानता है और न ही बेटे। एक-दूसरे का सहारा बन कर ये लोग अपनी ज़िंदगी के अंधेरे को रंगीनी में बदलते हैं। संदीप शर्मा की लिखी कथा, पटकथा अच्छी है जिसमें मुश्किल वक्त में हिम्मत न हारने की सीख तो है ही, पिता और बेटों के आपसी प्यार का भी गहराई से चित्रण किया गया है। संदीप व वी.एम. बेचैन के के लिखे संवाद सटीक हैं और फिल्म को दिलचस्प व गाढ़ा बनाते हैं। फिल्म का अंत थोड़ा जल्दबाजी में बुना गया लगता है। क्लाइमैक्स को साध कर इस फिल्म को और अधिक असरदार बनाया जा सकता था।

Sarzameen
Drama, Thriller (Hindi)
फिल्मी ‘सरज़मीन’ पर नेपो किड्स का मिशन
Fri, July 25 2025
फिर ये ‘बॉलीवुड’ वाले कलपते हैं कि हमारे बच्चों को ‘नेपो किड्स’ मत कहिए, हम उन्हें नेपोटिज़्म के चलते फिल्में नहीं देते हैं बल्कि उनका टेलेंट देख कर काम देते हैं। तो भैया करण जौहर जी, ज़रा यह बताइए कि सैफ अली खान के सुपुत्र इब्राहीम अली खान का कौन-सा टेलेंट देख कर आपने उन्हें एक साथ ‘नादानियां’ और ‘सरज़मीन’ (Sarzameen) जैसी बड़ी फिल्मों में लिया? मार्च, 2025 में आई ‘नादानियां’ में इब्राहीम के ‘टेलेंट’ को तो आप ‘देख’ ही चुके होंगे। रही-बची कसर अब ‘सरज़मीन’ में दिख गई है। ‘सरज़मीन’ का निर्देशन आपने अभिनेता बोमन ईरानी के बेटे कायोज़ ईरानी को दिया। चलिए, वह तो कुछ फिल्मों में असिस्टैंट और ‘अजीब दास्तान्स’ की एक कहानी को अच्छे-से डायरेक्ट कर भी चुके हैं। लेकिन ‘सरज़मीन’ में उनके डायरेक्शन का ‘टेलेंट’ और उससे भी बढ़ कर किसी कथा-पटकथा को चुनने व उसे फिल्माने की उनकी प्रतिभा देख कर आपको सोचना होगा कि आप कैसे-कैसों पर भरोसा करने लगे हैं। कश्मीर की पृष्ठभूमि पर लिखी गई इस कहानी में एक आर्मी अफसर है जिसका मानना है कि सरज़मीन की सलामती से बढ़ कर कुछ भी नहीं, बेटा भी नहीं। ऐसे में वह झूल रहा है फर्ज़ और मोहब्बत के बीच। एक दिन वही बेटा उसके सामने आ खड़ा होता है। उधर उसकी पत्नी इन दोनों के बीच पुल बनाने का काम कर रही है।

Sant Tukaram
Drama (Hindi)
भक्ति रस से सराबोर ‘संत तुकाराम’
Sat, July 19 2025
17वीं शताब्दी के महाराष्ट्र में आए भक्त-कवि, समाज सुधारक, संत तुकाराम के परिवार का संबंध भगवान विष्णु के अवतार माने गए विट्ठल या विठोबा की उपासना करने वाले वारकरी समुदाय से था। उनसे पूर्व इस समुदाय में संत नामदेव, संत ज्ञानेश्वर व संत एकनाथ का नाम बड़ी श्रद्धा से लिया जाता है। अपने पूर्ववर्ती भक्त-कवियों, संतों की भांति उन्होंने भी विट्ठल की स्तुति में भक्ति काव्य रचा जिसे ‘अभंग’ कहा जाता है। यह फिल्म ‘राम कृष्ण हरि…’ जपने वाले उन्हीं संत तुकाराम की भक्तिमय कहानी दिखाती है। संत तुकाराम के जीवन पर फिल्में हमेशा से बनती आई हैं। 1921 में बनी मूक फिल्म ‘संत तुकाराम’ और 1936 में प्रभात फिल्म कंपनी से आई विष्णुपंत गोविंद दामले निर्देशित मराठी फिल्म ‘संत तुकाराम’ से लेकर आज तक विभिन्न भाषाओं में संत तुकाराम के जीवन का चित्रण सिनेमा में हुआ। लेकिन विडंबना यही है कि नई पीढ़ी के दर्शक आज भी महाराष्ट्र के बाहर उन्हें कम ही जानते हैं। ऐसे में हिन्दी में इस किस्म का सिनेमा आकर जब ज्ञानवर्धन के साथ-साथ भक्ति रस का संचार करता है तो वह सार्थक हो उठता है।

Tanvi the Great
Drama (Hindi)
मुश्किलों की चौखट लांघती ‘तन्वी द ग्रेट’
Fri, July 18 2025
तन्वी एक खूबसूरत युवती है। दिल्ली में अपनी मां के साथ रहती है। मीठा गाना गाती है। किस्म-किस्म की जानकारी जुटाना और उसे याद रखना उसकी आदत है। लेकिन वह ‘नॉर्मल’ नहीं है। वह ‘अलग’ है। ‘अलग’ है लेकिन किसी से ‘कमतर’ नहीं है यानी ‘डिफरेंट बट नो लैस’। दरअसल उसे ‘ऑटिज़्म’ है। (‘ऑटिज़्म’ यानी एक ऐसी अवस्था जिसमें इंसान के मस्तिष्क के विकास को नियंत्रित करने वाले धागे कुछ अलग, कुछ कमज़ोर, कुछ उलझे हुए होते हैं जिसके चलते उसका व्यवहार, उसकी आदतें, रूचियां, प्रतिक्रियाएं, सीखने की क्षमता आदि आम लोगों के मुकाबले कुछ अलग होती हैं, कभी कम तो कभी ज़्यादा होती हैं।) तन्वी के फौजी पिता एक हादसे में मारे जा चुके हैं। उसकी मां उसे उसके दादा के पास एक पहाड़ी कस्बे में छोड़ कर विदेश गई है। नई जगह, नए लोग, नया माहौल और तन्वी, जिसे पूरे करने हैं कुछ सपने-कुछ अपने, कुछ अपनों के। लेकिन कैसे? जिस तन्वी को जूतों के फीते तक बांधने में, घर की चौखट तक लांघने में मुश्किल आती है, वह कैसे लांघेगी सपनों के ऊंचे पर्वत…?

Special Ops 2
Mystery, Drama, Crime (Hindi)
रोमांच दोगुना मज़ा डबल ‘स्पेशल ऑप्स 2’ में
Fri, July 18 2025
मार्च, 2020 में आए ‘स्पेशल ऑप्स’ (Special Ops) के पहले सीज़न ने अपने प्रति जो दीवानगी हमारे दिलों में जगाई थी उसे नवंबर, 2021 में आई ‘स्पेशल ऑप्स 1.5-द हिम्मत स्टोरी’ ने डेढ़ गुना कर दिया था और तब से इस सीरिज़ के इंतज़ार में दर्शक पलकें बिछाए बैठे हैं। अब जियो हॉटस्टार पर ‘स्पेशल ऑप्स 2’ (Special Ops 2) में जिस तरह से रोमांच का दोहरा जाल बिछाया गया है उसे देखते हुए लगता है कि यह चुनौती नीरज पांडेय, शिवम नायर और उनकी टीम के सामने भी रही होगी कि उन्हें इस बार दर्शकों की उम्मीदों के उस बड़े पहाड़ पर चढ़ना है जिसे खुद उन्होंने ही तैयार किया था। शायद यही कारण है कि इस सीज़न को लाने में इन लोगों ने काफी लंबा वक्त लिया। लेकिन देर आए और बहुत ही दुरुस्त आए वाले स्टाइल में यह सीरिज़ अपने स्तर को बरकरार रखते हुए दर्शकों को रोमांच और आनंद परोस पाने में पूरी तरह से कामयाब रही है। ‘स्पेशल ऑप्स 2’ (Special Ops 2) का ट्रेलर बताता है कि किसी दुश्मन ने भारत के सबसे बड़े ए.आई. वैज्ञानिक को किडनैप कर लिया है। क्या चाहता है वह दुश्मन, इसका जवाब भी ट्रेलर देता है कि उसे भारत के उन सब लोगों के डाटा में घुसना हैं जो अपने मोबाइल पर रोजाना पैसों का लेनदेन करते हैं। कौन है यह दुश्मन और किस के इशारों पर काम कर रहा है? क्या भारतीय खुफिया एजेंसी का सबसे काबिल अफसर हिम्मत सिंह समय रहते उसे रोक पाएगा? यदि हां, तो कैसे, किस तरह…?

Maalik
Action, Thriller, Crime, Drama (Hindi)
चरस तो मत बोइए ‘मालिक’
Sat, July 12 2025
1990 के समय का इलाहाबाद। दीपक के मज़दूर पिता को किसी ने खेत समेत रौंद डाला तो उसे मार कर वह पॉवर का भूखा बन बैठा और जल्दी ही इलाके का ‘मालिक’ हो गया। उसकी मर्ज़ी के बगैर अब शहर में कुछ नहीं होता। लेकिन कुछ समय बाद वही लोग उसके खिलाफ हो गए जो कल तक उसके सरपरस्त थे। अब एक तरफ ‘मालिक’ है और दूसरी ओर उसके दुश्मन। हर तरफ से गोलियां बरस रही हैं और पुलिस कभी इस पाले में तो कभी उस पाले में कूद रही है। अपराधी, नेता और पुलिस की जुगलबंदी का प्लॉट हमारी फिल्मों के लिए कोई नया नहीं है। सच तो यह है कि यह जुगलबंदी हमारे समाज का ही एक ऐसा कड़वा और स्वीकार्य सच है जिसे फिल्म वाले अलग-अलग नज़रिए और अलग-अलग शैली में दिखाते रहते हैं। पर्दे पर ऐसी जुगलबंदियां जब शानदार निकलती हैं तो ‘सत्या’, ‘वास्तव’ हो जाती हैं और अगर बेकार निकलें तो ‘मालिक’ बन जाती हैं। ऐसी तमाम फिल्मों की तरह यह फिल्म भी इस बात को रेखांकित करती है कि ताकत पाने के बाद हर अपराधी सत्ता की कुर्सी चाहता है कि ताकि आज उसके पीछे पड़ी पुलिस कल उसकी बॉडीगार्ड बन जाए।

The Hunt: The Rajiv Gandhi Assassination Case
Crime, Mystery (Hindi)
राजीव गांधी हत्याकांड पर सधी हुई ‘द हंट’
Thu, July 10 2025
21 मई, 1991 की रात तमिलनाडु के श्रीपेरंबुदूर में एक महिला ने अपनी कमर में बंधे बम से अपने साथ-साथ वहां चुनाव प्रचार करने के लिए पहुंचे पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी को भी मार डाला था। पूरे विश्व को चौंका देने वाली इस घटना के तुरंत बाद भारत सरकार ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एस.आई.टी.) बनाई थी जिसने कदम-दर-कदम आगे बढ़ते हुए और एक सिरे से दूसरा सिरा जोड़ते हुए 90 दिनों में इस हमले की साज़िश रचने वालों को अपनी गिरफ्त में ले लिया था। इस पर पत्रकार अनिरुद्ध मित्रा ने एक किताब ‘90 डेज़’ लिखी थी जिस पर निर्देशक नागेश कुकुनूर ने यह वेब-सीरिज़ ‘द हंट-द राजीव गांधी एसेसिनेशन केस’ बनाई है जो सोनी लिव पर रिलीज़ हुई है। एक ऐसी घटना जिसके पल-पल का ब्यौरा दस्तावेजों में, खबरों में मौजूद है, जिसके बारे में सब जानते हैं कि पड़ोसी देश श्रीलंका में अपने लिए अलग क्षेत्र ‘तमिल ईलम’ की मांग कर रहा हिंसावादी संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) राजीव गांधी से इसलिए खफा था कि उन्होंने वहां भारत से शांति सेना भेज कर उन्हें काफी नुकसान पहुंचाया था। राजीव गांधी ने ऐलान किया था कि 1991 के चुनाव जीतने के बाद वह फिर श्रीलंका में सेना भेजेंगे। लिट्टे ने इसीलिए उन्हें मारने की योजना बनाई थी जिसमें वे सफल भी हुए। उस घटना के बाद इस साज़िश और तफ्तीश पर ढेरों किताबें लिखी गईं और कुछ एक फिल्में भी बनीं। लेकिन इस वेब-सीरिज़ ने जो दिखाया है वह जैसे इतिहास को जीने जैसा अनुभव देता है।

Metro... in Dino
Drama, Romance, Comedy (Hindi)
मस्त पवन-सी है ‘मैट्रो… इन दिनों’
Fri, July 4 2025
2007 में आई अनुराग बसु की ही फिल्म ‘लाइफ इन ए… मैट्रो’ (Life In A… Metro) की तरह इस फिल्म ‘मैट्रो… इन दिनों’ (Metro… In Dino) में भी कई सारी कहानियां एक साथ चल रही हैं। बोरियत भरी शादीशुदा ज़िंदगी के बीच मोंटी घर से बाहर झांकता है और उसकी पत्नी काजोल उसे नचाती है। काजोल की छोटी बहन चुमकी अपने रिश्ते को लेकर कन्फ्यूज़ है। उसके करीब आया पार्थ तो किसी रिश्ते में ही नहीं पड़ना चाहता। पार्थ के दोस्त श्रुति और आकाश अपनी शादी, बच्चे और कैरियर के संघर्षों में उलझे हुए हैं। उधर काजोल की मां एक बार फिर अपने कॉलेज के दोस्त परिमल के पास जा पहुंची है। साथ ही परिमल की बहू और काजोल की बेटी की अलग-अलग कहानियां भी चल रही हैं। ‘लाइफ इन ए… मैट्रो’ जहां मुंबई शहर के कुछ जोड़ों को दिखा रही थी वहीं इस फिल्म ‘मैट्रो… इन दिनों’ (Metro… In Dino) में अनुराग की कलम ने मुंबई के अलावा दिल्ली, बंगलुरु, पुणे, कोलकाता जैसे शहरों में कहानी का विस्तार किया है जो दर्शाता है कि स्त्री-पुरुष संबंधों की उलझनें और सुलझनें कमोबेश हर जगह एक-सी हैं। अलग-अलग किस्म के किरदारों के ज़रिए वह इस बात को भी उभार पाते हैं कि रिश्तों की पेचीदगियां हर इंसान के खाते में दर्ज होती हैं। फिल्म में एक बात खास तौर पर उभर कर आती है कि रिश्तों में पारदर्शिता और संवादों की कमी से बात बिगड़ती है तो संभालने से संभल भी जाती है, बस कोशिशें जारी रहें।
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