
Deepak Dua
Independent Film Journalist & Critic
Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.
A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra
All reviews by Deepak Dua

Pati Patni Aur Woh Do
Comedy (Hindi)
‘पति पत्नी और’ बिना मसाले की ‘वो दो’
Sat, May 16 2026
दिसंबर, 2019 में आई मुदस्सर अज़ीज़ की ‘पति पत्नी और वो’ असल में 1978 में आई दिग्गज निर्देशक बी.आर. चोपड़ा की फिल्म ’पति पत्नी और वो’ का रीमेक थी। मूल फिल्म में संजीव कुमार, विद्या सिन्हा और रंजीता थे जबकि 2019 वाली फिल्म में कानपुर में सरकारी नौकरी कर रहा इंजीनियर कार्तिक आर्यन अपनी पत्नी भूमि पेढनेकर से छुपा कर अनन्या पांडेय से अफेयर कर रहा था। यह रीमेक ओरिजनल फिल्म की तरह क्लासिक भले ही नहीं थी लेकिन मसालेदार थी, सो कामयाब भी हुई। उस फिल्म के रिव्यू में मैंने लिखा था कि अब क्लासिक फिल्में किसे चाहिएं? जब दर्शक जंक-फूड से खुश हों तो फिल्म वाले भी क्यों ज़ोर लगाएं।

Kartavya
Crime, Drama, Thriller (Hindi)
रूखा-सूखा ‘कर्तव्य’
Fri, May 15 2026
एक पुलिस वाला दूसरे पुलिस वाले से कह रहा है-‘धरम करते हैं करम छूटता है, करम करते हैं धरम छूटता है। कर्तव्य तक तो बात ही नहीं पहुंचती।’ गौर करें तो यह संवाद ही अपने-आप में गलत है। कर्तव्य का अर्थ ही होता है ‘धर्मानुकूल कर्म’ यानी अपने धर्म को निभाते हुए किया गया कर्म। लेकिन हमारे फिल्मी लेखकों को तो भारी-भरकम संवाद लिखने हैं, भले ही उनका कुछ अर्थ निकले या न निकले। रही-सही कसर तब पूरी हो जाती है जब ये भारी संवाद एक हल्की कहानी और कमजोर स्क्रिप्ट में जबरन घुसाए जाते है। साफ लगता है कि दो चवन्नियां चिपका कर अठन्नी बनाने की कोशिश हो रही है। इन्हीं चिपकी हुई चवन्नियों को ट्रेलर में देख कर दर्शक फिल्म (Kartavya) देखने बैठता है और जब खुद को ठगा हुआ महसूस करता है तो सोचता है काश, रिव्यू पहले पढ़ लिया होता।
Krishnavatar Part 1: Hridayam
Adventure, Romance, Drama (Hindi)
प्रेम-रस से सराबोर ‘कृष्णावतारम’
Mon, May 11 2026
‘तो जाऊं राधे…?’ वृंदावन छोड़ते समय कृष्ण ने पूछा। ‘जाओ, अब हम तुम्हारे साथ-साथ तुम्हारी प्रतीक्षा से भी प्रेम करेंगे।’ राधा का जवाब था। कहिए, वह कौन-सा हृदय होगा जो प्रेम से पगे ऐसे मीठे संवाद सुन कर भर न आएगा…! यह फिल्म ‘कृष्णावतारम’ (Krishnavataram Part 1) देखिए तो ऐसे अनेक संवाद, ऐसे अनेक दृश्य मिलेंगे जो आपके अंतस में गहरे उतरते हुए आपको भावुक करेंगे। कृष्ण और राधा को मानने वाले तो न जाने कितने ही दृश्यों पर अपनी आंखों में भर आए प्रेमाश्रुओं को भी महसूस करेंगे। यह इस कहानी की सफलता है। यह राधा और कृष्ण के हमारे दिलों में बसे होने का प्रमाण है। इधर कुछ समय से भारतीय सिनेमा में धार्मिक, पौराणिक कथाओं की जो आवक बढ़ी है उस पंक्ति में यह फिल्म मजबूती से आ खड़ी हुई है। इसके पूरे नाम ‘कृष्णावतारम पार्ट 1-द हार्ट (हृदयम)’ [Krishnavataram Part 1-The Heart (Hridayam)] से स्पष्ट होता है कि यह तो अभी शुरुआत है, आगे इस कथा के और भी अध्याय आने वाले हैं।

Raja Shivaji
Action, History, Drama (Marathi)
कसक छोड़ गई ‘राजा शिवाजी’
Sun, May 3 2026
पहले तो हम-आप इस बात पर हैरान हो सकते हैं कि इस फिल्म के नाम में ‘छत्रपति’ शब्द क्यों नहीं है। शिवाजी महाराज के बारे में हमें (महाराष्ट्र से बाहर वालों को) जितना और जैसा पढ़ाया गया है, उसके मुताबिक वह हमारे लिए ‘छत्रपति शिवाजी’ हैं जिन्होंने कम उम्र में ही तलवार उठा ली और ‘हिन्दवी स्वराज्य’ की स्थापना करते हुए इतने किले जीते कि उन्हें ‘छत्रपति’ की पदवी दी गई। शिवाजी की शौर्य गाथाएं भले ही हमने अधिक न पढ़ी हों, हम भारतीयों के लिए वह हमारे इतिहास के गौरवशाली नायक थे और हमेशा रहेंगे। फिर उन्हीं शिवाजी राजे की कहानी का नाम यूं सूखा-सा ‘राजा शिवाजी’ (Raja Shivaji) क्यों…?

Ek Din
Romance, Drama (Hindi)
‘एक दिन’ का सदमा
Fri, May 1 2026
ऑफिस के सब लोग घूमने के लिए जापान गए हैं। साथ काम करने वाली मीरा को चुप-चुप के देखने वाला दब्बू दिनेश वहां विश मांगता है कि मीरा उसकी हो जाए, एक दिन के लिए सही। और ऐसा हो भी जाता है। एक हादसे में मीरा को टी.जी.ए. हो जाता है, यानी उसकी याददाश्त चली जाती है, सिर्फ एक दिन के लिए। यह एक दिन मीरा और दिनेश एक साथ बिताते हैं। अगले दिन मीरा की मैमोरी वापस आ जाती है लेकिन वह दिनेश के साथ बिताए इस एक दिन को भूल जाती है। जाहिर है कि दिनेश को सदमा तो लगेगा ही, मगर फिर एक ट्विस्ट आता है…! 1983 में आई कमल हासन-श्रीदेवी वाली फिल्म ‘सदमा’ में याद्दाश्त खो चुकी श्रीदेवी की महीनों तक देखभाल करने वाले कमल को तब गहरा सदमा लगता है जब याद्दाश्त वापस आने के बाद श्रीदेवी उसे पहचानने से इंकार कर देती है। कुछ वही बात इस फिल्म (Ek Din) में भी है, लेकिन कुछ अलग अंदाज में, एक अलग ट्विस्ट के साथ। वह ट्विस्ट ही इस फिल्म में नया है वरना दो घंटे की इस फिल्म का पूरा निचोड़ तो इसके दो मिनट के ट्रेलर में दिख ही चुका है।

Bhooth Bangla
Horror, Comedy (Hindi)
खोखली ईंटों से बना ‘भूत बंगला’
Fri, April 17 2026
मंगल पुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतज़ार में बैठे चार युवकों को एक बाबा कहानी सुना रहा है कि कुछ साल पहले यहां शादियां नहीं हुआ करती थीं क्योंकि वधूसुर नामक राक्षस वधुओं को उठा लेता था। फ्लैश बैक में कहानी दिखने लगती है जिसमें लंदन में रहने वाला (अक्षय कुमार) अपने दादा की वसीयत से मिले महल में मंगलपुर आया है ताकि अपनी बहन की शादी यहां कर सके। इसके लिए वेडिंग प्लानर (परेश रावल), उसके सहयोगी, महल का मैनेजर (असरानी), नौकर-चाकर भी यहां हैं। एक राक्षस भी है, उससे भिड़ने के लिए गुरु जी और उनका चेला है। हीरो की बहन आती है, उसके ससुराल वाले, ज्योतिषी, और भी कई सारे लोग। एक हीरोइन भी बीच-बीच में आती-जाती रहती है। ज़ाहिर है कि इस भीड़भाड़ में कॉमेडी, डर, रोमांच, रोमांस जैसे रस निकलते-बहते रहते हैं।

Matka King
Drama, Crime (Hindi)
अपनी छवि चमकाने आया ‘मटका किंग’
Fri, April 17 2026
50 के दशक में मुंबई की कपड़ा मिलों के इलाके में काम करने वाले रतन खत्री ने देखा कि कल्याणजी भगत नाम का एक आदमी न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचैंज में कपास के चढ़ते-गिरते भावों पर लोगों से सट्टा लगवाता है। तब रतन खत्री ने एक नया खेल शुरू किया। जुए के इस खेल को रोचक बनाते हुए वह एक मटके में ताश के पत्ते डाल कर सबके सामने निकालता और जीतने वालों को तुरंत पैसे देता। कुछ ही सालों में उसका यह खेल ‘मटका’ पूरे देश में फैल गया। एक दिन में एक करोड़ रुपए तक का सट्टा लगने लगा और लोग उसे ‘मटका किंग’ तक कहने लगे। बाद में वह फिल्म निर्माण में भी घुसा। 1975 में इमरजैंसी लगी तो उसे जेल में भी डाला गया। वहां से छूट कर उसने फिर यह काम शुरू कर दिया और 90 के दशक तक सक्रिय रहा। 2020 में रतन खत्री की मृत्यु हुई।

Toh Ti Ani Fuji
Romance, Drama (Marathi)
सधी, संभली प्रेम कहानी ‘मैं वो और फुजी’
Sat, April 11 2026
जापान के फुजी पर्वत को नखरे वाला पर्वत माना जाता है। कभी यह मीलों दूर से भी दिख जाता है तो कभी पास से भी नज़र नहीं आता है। ज़्यादातर तो यह बादलों में ही छिपा रहता है और कभी अचानक से मन मोहने वाली अदाएं बिखेरने लगता है। हालांकि यह सवा तीन सौ साल पहले आखिरी बार फटा था लेकिन आज भी इसे एक जीवित ज्वालामुखी माना जाता है। इस फिल्म में फुजी का क्या किरदार है, यह आगे समझेंगे लेकिन पहले यह जान लीजिए कि सोनीलिव पर आई यह एक मराठी फिल्म है जिसका मूल नाम ‘तो ती आणि फुजी’ (Toh Ti Ani Fuji) (मैं वो और फुजी Main Woh Aur Fuji) है और यह मराठी के साथ-साथ हिन्दी में भी देखी जा सकती है।
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Comedy (Hindi)
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