
Deepak Dua
Independent Film Journalist & Critic
Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.
A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra
All reviews by Deepak Dua

| Director: | Indra Kumar |
|---|---|
| Cast: | Ajay Devgn, Arshad Warsi, Riteish Deshmukh, Javed Jaffrey, Sanjay Mishra, Ravi Kishan, Upendra Limaye, Anjali Anand, Sanjeeda Sheikh, Esha Gupta |
Dhamaal 4
Comedy (Hindi)
‘धमाल 4’ में मिलेगा कॉमेडी का खज़ाना…?
Sat, July 11 2026
2007 में आई पहली वाली ‘धमाल’ में गोआ के एक पार्क में ‘डब्ल्यू’ आकार में खड़े पेड़ों के नीचे खज़ाना दबा था। इस बार एक वीरान टापू में ‘एम’ आकार में खड़ी पहाड़ियों के नीचे खज़ाना है। खज़ाना भी किसका, सौ साल पहले एक डाकू शैतान सिंह का जो वह अंग्रेज़ों से लूटा करता था। अब इस खज़ाने को खोजने निकली हैं तीन टीमें-गुड्डू और जॉनी, आदि और मानव व आदि की पत्नी, लल्लन और उसकी पत्नी। साथ ही इनके पीछे पड़े हैं डाकू अधूरा और उसके साथी। इस सफर में हैं ढेरों मुसीबतें, उनसे बचने की कसरतें और इन सब की लल्लुआना हरकतें। ज़ाहिर है मकसद आपको हंसाना है, ठहाके लगवाना है। ‘धमाल’ सीरिज़ की फिल्में दर्शकों को किसी वीडियोगेम या कार्टून कॉमिक्स के भीतर ले जाती रही हैं। एक ऐसा संसार जहां फिज़िक्स-कैमिस्ट्री के नियमों की धज्जियां उड़ा कर उनसे हास्य उपजाया जाता है। किसी ने घर की घंटी बजाई और उससे आने वाले करंट ने बंदे का तंदूरी मुर्गा बना दिया या किसी के बम में चाकू घुसने के बावजूद खून न निकलना जैसे ये सीन हमें डोनाल्ड डक, मिकी माउस या टॉम एंड जैरी की दुनिया में ले जाते हैं। उनमें जो होता है वह कहीं से भी तार्किक नहीं लगता, लेकिन उसे देख कर आप हंसते हैं, ठहाके लगाते हैं, आपको मज़ा आता है और आपका दिल-दिमाग हल्का होता है। यह फिल्म भी आपको वही मज़ा देती है। बस, बच्चे बन जाइएगा इसे देखते हुए।

| Director: | Siddharth P. Malhotra |
|---|---|
| Cast: | Sunny Deol, Akshaye Khanna, Tillotama Shome, Dia Mirza, Sanjeeda Sheikh, Jyoti Mukherji, Shishir Sharma, Akansha Ranjan Kapoor, Vijay Vikram Singh, Daria Bedi |
| Writer: | Suparn Verma |
Ikka
Drama, Thriller (Hindi)
‘इक्का’ तो हल्का निकला
Fri, July 10 2026
‘इक्का’ समझते हैं न आप? ताश के खेल में सबसे अव्वल माना जाता है इसे। वकील अर्जुन मेहरा को लोग इक्का कहते हैं क्योंकि वह आज तक कोई केस नहीं हारा। और यह तब है जब वह हमेशा मासूमों के पक्ष में हक के लिए लड़ता है। लेकिन इस बार मामला अलग है। उद्योगपति नेता का बिगड़ैल बेटा शौर्यमन एक लड़की के मर्डर के मामले में फंसा है। अर्जुन को किसी मजबूरी के चलते यह केस लेना पड़ता है। आखिर क्या थी उसकी मजबूरी? और क्या अर्जुन इस बार गलत आदमी का साथ दे रहा है? क्या वह यह केस हारेगा या जीत कर इक्का बना रहेगा? देखने-सुनने में यह फिल्म (Ikka) एक थ्रिलरनुमा कोर्टरूम ड्रामा लग रही है। ऐसी फिल्मों में कहानी बताई नहीं, छुपाई जाती है। इसका ट्रेलर भी कुछ खास परतें नहीं खोल रहा है। खासतौर से अर्जुन की उस मजबूरी का ज़िक्र कहीं नहीं है जिसके चलते वह शौर्यमन गौड़ का केस लेता है। (फिल्म में सरनेम ‘गौर’ व ‘गौड़’ बोला गया है। भई ऐसा सरनेम रखते ही क्यों हो जिसे रोमन में पढ़ कर एक्टर ठीक से बोल ही न पाएं?) इस फिल्म को देखते समय लगता है कि स्क्रीन पर सब ठीक-ठाक चल रहा है। लेकिन बहुत जल्दी इस ठीक-ठाक के नीचे दबी कहानी का पिलपिलापन महसूस होने लगता है। फिल्म खत्म होते-होते काफी कुछ अधूरा-सा, बनावटी-सा, जबरन-सा महसूस होने लगता है। जब आप खुद से सवाल पूछते हैं कि यह जो देखा, इसमें गहराई कितनी थी तो अंदर से कोई ढंग का जवाब नहीं आता।

| Director: | Shiv Rawail |
|---|---|
| Cast: | Alia Bhatt, Sharvari, Bobby Deol, Anil Kapoor, Dibyendu Bhattacharya, Dia Mirza, Hrithik Roshan |
Alpha
Action, Thriller (Hindi)
छोल्जर छोल्जर ‘ऐल्फा’ छोल्जर
Fri, July 3 2026
सबसे पहले – ‘मैं सीत्ता पर हाथ रख कर कसम खाता हूं कि इस फिल्म को देखते समय मैं अपने दिमाग में कोई सवाल नहीं आने दूंगा, ‘धुरंधर’ को बिल्कुल याद नहीं करूंगा और इस फिल्म को देखने के बाद मैं थिएटर की दीवारों पर सिर पटक-पटक कर अपनी जान भी नहीं दूंगा।’ चलिए अब आगे बढ़ते हैं। एक सीन देखिए – सर हमने मकान को चारों तरफ से घेर लिया है। ठीक है, लेकिन सीत्ता को आंच नहीं आणी चाहिए। इसके बाद वे बंदे चारों तरफ से उस लकड़ी के मकान पर सैंकड़ों गोलियां ऐसे बरसाते हैं जैसेकि सर के आदेश के बाद कोई गोली सीत्ता को छू भी न सकेगी। अरे बावलो, कुछ तो दिमाग लगाओ, सीत्ता अगर ऐन वक्त पर नीचे न बैठी होती तो तुम सर को क्या जवाब देते? हां तो साहेबान, मेहरबान, कद्रदान, बिछ गया है यशराज फिल्म्स का चमकीला दस्तरखान। और इस पर परोस दिया गया है भव्यता, रंगीनियत, चमक-दमक और चटकीलेपन में लिपटा वही पुराना खोखला सामान। ‘बॉलीवुड’ के सभी बड़े निर्माता अब यही तो कर रहे हैं। कंटेंट की जगह अब पैकेजिंग का ज़माना आ चुका है। दर्शकों को मूर्ख बनाना इतना आसान पहले कभी न था।

| Director: | Amir Satyaveer Singh, Avinash Arun |
|---|---|
| Cast: | Vir Hirani, Arshad Warsi, Vikrant Massey, Mona Singh, Rajesh Sharma, Mohit Chauhan, Shruti Marathe, Naina Sareen, Satyadeep Misra, Harshika Kewalramani |
Pritam and Pedro
Crime, Drama, Mystery (Hindi)
पिद्दी और पिद्दी का शोरबा ‘प्रीतम एंड पैद्रो’
Fri, July 3 2026
गोआ पुलिस के इंस्पैक्टर पैद्रो (सब उसे और वह खुद को पैद्रो इच बोलता बाबा) को एक मंत्री की नाराजगी ने क्राइम ब्रांच से साइबर सेल में भेज दिया। पैद्रो को क्राइम में मज़ा आता, क्राइम का खुशबू उसको पसंद आता, साइबर की एबीसी उसको बिल्कुल इच नईं पता। तभी उस मंत्री का बेटा किडनैप हो गया। पैद्रो एक साइबर एक्सपर्ट पीटर की मदद ले रहा ताकि केस सुलझे और वह अपनी ट्रांस्फर वापस क्राइम में करवा सके। लेकिन यह सब इतना आसान होता क्या? वह बच्चा किसने किडनैप किया, काय कू किडनैप किया, उसको कैसे वापस लाना मांगता, इसके अलावा और भी बोत सारी मचमच है इस वेब-सीरिज़ ‘प्रीतम और पैद्रो’ (Pritam And Pedro) में जो जियो हॉटस्टार पर रिलीज हुई है।

| Director: | Ahmed Khan |
|---|---|
| Cast: | Akshay Kumar, Suniel Shetty, Arshad Warsi, Jacqueline Fernandez, Disha Patani, Raveena Tandon, Jackie Shroff, Paresh Rawal, Lara Dutta, Farida Jalal |
| Writer: | Farhad Samji |
Welcome to the Jungle
Action, Comedy, Adventure, Crime (Hindi)
‘वैलकम टू द जंगल’ ऑफ पागलपंती
Fri, June 26 2026
फिल्में दो तरह की होती हैं। एक तो वे जिन्हें देखने का फैसला आमतौर दर्शक लोग रिव्यू आदि जानने के बाद करते हैं। तारीफें सुन लीं तो चले गए, बुराई सुन ली तो छोड़ दिया। दूसरी तरह की फिल्में वे होती हैं जिन्हें रिव्यू की ज़रूरत ही नहीं होती। लिखने वाले सिर पटकें या छाती पीटें, देखने वाले इन्हें देख ही लेते हैं। ‘वैलकम टू द जंगल’ इसी तरह की फिल्म है। दर्शक भी दो तरह के होते हैं। एक तो वे जो फिल्मों को देखने का फैसला उनके बारे में जानने के बाद ही करते हैं। कहीं से तारीफें सुनीं तो देख आए, बुराई पता चली तो छोड़ दिया। दूसरी तरह के दर्शक वे होते हैं जिन्हें फर्क ही नहीं पड़ता कि रिव्यू कैसे हैं। ‘वैलकम टू द जंगल’ ऐसे ही दर्शकों के लिए है। जिस फिल्म को फरहाद सामजी ने लिखा हो और अहमद खान ने बनाया हो उससे किसी किस्म के सयानेपन की उम्मीद लगाने वाले से बड़ा बेवकूफ कोई नहीं हो सकता। ज़रूर इन के पास फिल्म इंडस्ट्री के बड़े-बड़े लोगों के काले कारनामों के वीडियो होंगे, वरना यूं ही हर कोई इन पर मेहरबान नहीं होता। खैर, हमें तो शर्म स्वर्गीय नीरज वोरा जी को याद करके आ रही है जिनकी लिखी कहानी इन हाथों में आ पड़ी।

| Director: | Homi Adajania |
|---|---|
| Cast: | Shahid Kapoor, Kriti Sanon, Rashmika Mandanna, Rohit Saraf, Dimple Kapadia, Arjun Rampal, Ishita Dutta, Sanjay Dutt |
| Writer: | Luv Ranjan |
Cocktail 2
Romance, Comedy (Hindi)
मादकता थोड़ी कम है इस ‘कॉकटेल 2’ में
Fri, June 19 2026
पहली बात-यह फिल्म ‘कॉकटेल 2’ 2012 में आई सैफ अली खान, डायना पेंटी, दीपिका पादुकोण (गौतम, मीरा, वेरोनिका) वाली फिल्म ‘कॉकटेल’ का सीक्वेल नहीं है। उस फिल्म में भी दो लड़कियों और एक लड़के के बीच के रिश्तों का कॉकटेल था, इसमें भी है, सो इस फिल्म का नाम वैसा ही रख दिया गया। हालांकि कुछ और भी रखा जा सकता था लेकिन फिर ‘कॉकटेल’ के ब्रांड-नेम का फायदा नहीं मिल पाता न। अपने फ्लेवर में यह फिल्म उसी के जैसी है-रंगीन, बोल्ड, दिल-दिमाग से ज़्यादा आंखों को भाने वाली। दीया और कुणाल कई साल से एक साथ रह रहे हैं। ‘शादी कब करोगे’ के सवाल पर तंग आकर वे खुद कहते हैं कि शादी के बाद किए जाने वाले सारे काम वे कर चुके हैं, बस रस्में बाकी हैं। वे छुट्टी मनाने इटली जाते हैं जहां मिलती है दीया की सहेली जिसका नाम है ऐली, रहती है अकेली और है जैसे कोई पहेली। दीया के कहने पर ऐली कुणाल पर लाइन मारती है ताकि उसकी वफादारी चैक की जा सके। कुणाल फिसलता है या नहीं लेकिन ऐली ज़रूर फिसल जाती है। अब भसड़ यह मची है कि कुणाल किस से शादी करेगा या कौन कुणाल से शादी करेगी या कुणाल शादी करेगा भी या नहीं।

| Director: | Manoj Tapadia |
|---|---|
| Cast: | Kangana Ranaut, Girija Oak, Smita Tambe, Esha Dey, Asha Shelar, Suhita Thatte, Rasika Agashe, Prasad Oak, Aditya Mishra, Vijay Gokhale |
| Writer: | Manoj Tapadia |
Bharat Bhhagya Viddhaata
Drama, Thriller (Hindi)
हम, आप, सब हैं ‘भारत भाग्य विधाता’
Fri, June 12 2026
ड्यूटी फर्स्ट…! बस यह कहा और निकल गई काम पर। बीमार बच्चे को छोड़, अधूरा खाना छोड़, आधी नींद छोड़, फुनफुनाती सास को छोड़, भुनभुनाते पति को छोड़, खुद अपनी खराब तबियत को पीछे छोड़ वह पहुंची अस्पताल और यूनिफॉर्म पहनते ही उसके भीतर आ गई सुपर पॉवर। जी हां, यह होती है नर्स। ऐसी ही एक सुपर नर्स अंजलि कुल्थे और उन जैसे कई कर्मठ कर्मियों के साहस को सलाम करने आई है यह फिल्म जो न सिर्फ पूछती है बल्कि बताती भी है कि कौन हैं हमारे असली ‘भारत भाग्य विधाता’। 26 नवंबर, 2008 की उस मनहूस रात मुंबई की छाती को ज़ख्मी करने आए दस पाकिस्तानी आतंकियों में से दो इस्माइल खान व अजमल कसाब कामा अस्पताल में भी जा घुसे थे। तब महिलाओं और बच्चों के इस अस्पताल के स्टाफ ने साहस का परिचय देते हुए सारे मरीजों को यहां-वहां छुपा कर वार्ड के ताले व बत्तियां बंद कर उन्हें बचाया था। इसी स्टाफ में थीं नर्स अंजलि कुल्थे जिन्होंने उस रात न सिर्फ 20 गर्भवती महिलाओं को बचाया बल्कि बाद में ज़िंदा पकड़े गए एकमात्र आतंकी अजमल कसाब को पहचानने में पुलिस की मदद भी की थी। इस फिल्म की नर्स गीता का किरदार उन्हीं अंजलि से प्रेरित है।

| Director: | David Dhawan |
|---|---|
| Cast: | Varun Dhawan, Mrunal Thakur, Pooja Hegde, Maniesh Paul, Chunky Panday, Jimmy Shergill, Mouni Roy, Rakesh Bedi, Kubbra Sait, Rajesh Kumar |
Hai Jawani Toh Ishq Hona Hai
Romance, Comedy (Hindi)
दो बेबी और एक शोना है-‘है जवानी तो इश्क होना है’
Sat, June 6 2026
इस किस्म की फिल्में दर्शकों के दिमाग के लिए नहीं बल्कि उससे नीचे के अंगों के लिए बनाई जाती हैं। इसे देखिए आंखों को गर्माने के लिए, दिल को धड़काने के लिए और बदन को फड़काने के लिए। सवाल उठाने या खून जलाने के लिए नहीं...
शादी को पांच साल हुए। जस को बच्चा चाहिए, बानी को नहीं। तलाक की नौबत। जस आगे बढ़ गया। उसे प्रीति मिली। एक दिन पता चला कि प्रीति मां बनने वाली ह-जस के बच्चे की। अचानक बानी वापस आ गई। वह भी मां बनने वाली है-जस के बच्चे की। अब जस बेचारा डबल रोल खेल रहा है। कभी प्रीति कभी बानी के बीच झूल रहा है। इस झोलझाल में और भी कई किरदार आ-आकर अपनी पींगें बढ़ा रहे हैं। क्या होगा जस का? बानी के पास जाएगा या प्रीति के? या फिर…? जिन दर्शकों ने डेविड धवन की फिल्में देखी हैं उन्हें मालूम है कि डेविड किस किस्म का सिनेमा बनाते हैं। उनके सिनेमा में दिमाग को टैंशन मुक्त करके एन्जॉय वाले मोड में डाला जाता है, तर्क और सवाल उठाने वाली नसों को ढीला छोड़ा जाता है, पलकों को झपकाए बिना पर्दे पर तेज रफ्तार से आ रहे रंग-बिरंगे नजारों से आंखों को सेंका जाता है, कानों को खुला रखा जाता है ताकि चुलबुली बातें मिस न हो जाएं और साथ ही कदमों व सिर को गानों के साथ थिरकाया जाता है। तो लो जी मुबारक हो, डेविड धवन के सिग्नेचर स्टाइल वाला वही सिनेमा एक बार फिर आपके सामने है।
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