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Deepak Dua

Independent Film Journalist & Critic

Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.

A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra

All reviews by Deepak Dua

Image of scene from the film Dial 1975
Director:Navneet Behal, Vibhu Kashyap
Cast:Kay Kay Menon, Kirti Kulhari, Pravessh Rana, Vishwanath Chatterjee

Dial 1975

Thriller, Drama (Hindi)
This Review appeared in 'Cineyatra.com'

‘डायल 1975’ फोर कन्फ्यूज़न

Fri, August 21 2026

इस फिल्म ‘डायल 1975’ की कहानी कुछ यूं है कि… यार, मैं न बता रहा कहानी। पूरी फिल्म देख ली, इत्ती लंबी और उलझी हुई कहानी है कि देखने में माथा खराब हो गया, अब बताने में भी होगा। एक काम कीजिए, खुद ही ट्रेलर में देख लीजिए, अगर वह भी समझ में आ जाए तो। हां तो, अब आपकी समझ में आ गया होगा कि… बताइए क्या समझ में आया? नहीं आया न कुछ? चलिए मैं कोशिश करता हूं। जून 1975 में तब की ताकतवर प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारत में इमरजैंसी लगवा दी थी। उन दिनों हर तरफ नज़र रखी जा रही थी, फोन-शोन रिकॉर्ड हो रहे थे, ऐसे में एक फोन-कॉल रिकॉर्ड होता है कि जर्मनी से एक ब्रीफकेस आ रहा है जिसमें आने वाले ज़माने का एक यंत्र है। इसकी डील चार लाख रुपए में एक होटल में होगी। अब बहुत सारे लोग इस डील के आगे-पीछे घूम रहे हैं। किसी को उस कॉल-रिकॉर्डिंग की टेप चाहिए, किसी को वह ब्रीफकेस, किसी को चार लाख रुपए तो किसी और को कुछ और। इन सारी चाहतों को पूरा करने के लिए अलग-अलग लोग, अलग-अलग लोगों को ज़िम्मेदारी देते हैं और ये अलग-अलग लोग बहुत सारे अलग-अलग लोगों को मारे जा रहे हैं।

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Image of scene from the film Batwara 1947
Director:Rajkumar Santoshi
Cast:Sunny Deol, Preity Zinta, Shabana Azmi, Ali Fazal, Karan Deol, Abhimanyu Singh, Kanikka Kapur, Khushi Hajare, Mithun Chakraborty, Mona Singh

Batwara 1947

Action, Drama, War (Hindi)
This Review appeared in 'Cineyatra.com'

इंसानियत की बात ‘बंटवारा 1947’ में

Sat, August 15 2026

1947 में हुए देश के बंटवारे के समय हर तरफ मची मारकाट के बीच मेरठ का सिकंदर मिर्ज़ा किसी तरह बच-बचाकर अपने परिवार के साथ लाहौर पहुंचा। कुछ दिन बाद उसे किसी हिन्दू की छोड़ी एक हवेली भी अलॉट हो गई। पर उस हवेली में तो उस हिन्दू की मां छुपकर बैठी थी, अपने बेटे के इंतज़ार में। शुरुआती ना-नुकर के बाद सिकंदर के परिवार ने तो उस औरत से तालमेल बिठा लिया लेकिन मज़हब और सियासत के कुछ ठेकेदारों को यह मंज़ूर नहीं हुआ। और फिर एक दिन…! यह कहानी दरअसल हिन्दी के मशहूर लेखक असगर वजाहत के 1989 में लिखे गए एक नाटक ‘जिस लाहौर नइ देख्या ओ जम्याइ नइ’ (जिसने लाहौर नहीं देखा वह पैदा ही नहीं हुआ) की है जो देश-दुनिया में काफी लोकप्रिय हुआ। किसी ज़माने में पंजाबी में यह कहावत कही जाती थी क्योंकि उस समय का लाहौर शहर अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास, भव्यता, मेल-जोल वाली जीवन शैली आदि के लिए जाना जाता था और यह माना जाता था कि जिसने यह शहर नहीं देखा, उसका कोई वजूद ही नहीं है। लेकिन इसी शहर में बंटवारे के दिनों में कुछ लोगों ने इतिहास पर पानी फेरा था, संस्कृति का कत्ल किया था, भव्यता को उजाड़ा था और मेल-जोल की भावना को मिट्टी में मिलाया था। उसी लाहौर का चित्रण असगर वजाहत ने अपने इस नाटक में किया था जिसका नाम अपने-आप में एक व्यंग्य था। उसी कहानी को राजकुमार संतोषी अपनी इस फिल्म में लेकर आए हैं।

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Image of scene from the film Ohh My Dog
Director:Amit Rai
Cast:Shreedhar Dubey, Pankaj Tripathi, Rajesh Kumar, Pavan Malhotra, Geeta Agrawal Sharma, Jitendra Joshi, Bullu Kumar, Sulakshana Baruah
Writer:Amit Rai

Ohh My Dog

Drama, Family (Hindi)
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सबके साथ देखिए ‘ओह माई डॉग’

Fri, August 7 2026

कहानी-1-असम में एक किशोर अपू का कुत्ता मोमो अचानक गायब हो गया है। पुलिस अंकल का कहना है कि कुछ लोगों को कुत्तों का मांस पसंद है इसलिए इस इलाके से कुत्तों की स्मगलिंग हो रही है। लेकिन तेज दिमाग वाला अपू हार नहीं मानता और आधुनिक तकनीक के सहारे मोमो को तलाशने निकल पड़ता है। कहानी-2-बिहार में एक किशोर श्रमिक प्रिंस अचानक गायब हो गया है। पुलिस का कहना है कि होगा यहीं कहीं, कल तक आ जाएगा। लेकिन तेज दिमाग वाला उसका कुत्ता ऑस्कर हार नहीं मानता और अपने साहस व बुद्धि के सहारे प्रिंस को तलाशने निकल पड़ता है।

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Image of scene from the film Operation Safed Sagar
Director:Oni Sen
Cast:Dia Mirza, Jimmy Shergill, Siddharth, Abhay Verma, Mihir Ahuja, Taaruk Raina, Arnav Bhasin, Prajakta Koli, Adil Hussain, Vinay Pathak

Operation Safed Sagar

Drama (Hindi)
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शौर्य और दुस्साहस की गाथा ‘ऑपरेशन सफेद सागर’

Fri, August 7 2026

कारगिल वॉर के दौरान उड़ान भरने को आतुर एक फाइटर पायलट को उसका कमांडर यह कह कर रोकने की कोशिश करता है कि उसकी पत्नी प्रेग्नेंट है। वह युवा पायलट, जिसे यह खबर अभी-अभी मिली, पल भर को रुकता है और कहता है, ‘यह मेरा पर्सनल मैटर है सर, यह मुझे उड़ने से रोकने का कारण नहीं हो सकता।’ सोचिए, क्या तो जज़्बा रहता है हमारे जवानों में। मालूम है कि दुनिया की सबसे ऊंची और खतरनाक पहाड़ियों पर आ जमे शत्रुओं पर रात के अंधेरे में घने बादलों से गुज़रते हुए बम बरसाते समय उनकी जान भी जा सकती है लेकिन वे रुके नहीं, थके नहीं। यही बात हमारी सेना को अलग बनाती है। इस बात का यथार्थ चित्रण इस वेब-सीरिज़ ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ (Operation Safed Sagar) को उन फिल्मों से अलग बनाता है जिनमें एयरफोर्स वाले ‘फिल्मी’ कारनामे करते दिखाई देते हैं।

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Image of scene from the film Uttar Da Puttar
Director:Ravinder Siwatch
Cast:Annu Kapoor, Rukhsar Rehman, Brijendra Kala, Pavan Malhotra, Ishtiyak Khan, Jeeveshu Ahluwalia, Rajendra Sethi, Sumit Gulati, Nitin Arora
Writer:Ravinder Siwatch

Uttar Da Puttar

Comedy (Hindi)
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साफ-सुथरा मनोरंजन

Sat, July 25 2026

साई राम टुटेजा फिज़िक्स पढ़ाते हैं लेकिन वास्तुशास्त्र और ज्योतिष आदि पर उनका अटूट विश्वास है। वह एक परफैक्ट 90 डिग्री उत्तर दिशा वाला मकान खरीदने के लिए भटक रहे हैं। काफी मशक्कत के बाद उन्हें ऐसा एक प्लॉट मिलता है जिस पर वह मकान बनवा भी लेते हैं। पर जहां उस मकान पर कई दूसरे लोगों की नज़र है वहीं भ्रष्ट सरकारी अफसर भी बीच में फच्चर फंसा रहे हैं। ऐसे में साई राम क्या करेंगे? सहारा लेंगे अपने विश्वास का या फिर चलेंगे तिकड़म भरी कोई चाल? यह फिल्म ‘उत्तर दा पुत्तर’ (Uttar Da Puttar) इन्हीं सब बातों को हल्के-फुल्के ढंग से देखती और दिखाती है।

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Image of scene from the film Dhamaal 4
Director:Indra Kumar
Cast:Ajay Devgn, Arshad Warsi, Riteish Deshmukh, Javed Jaffrey, Sanjay Mishra, Ravi Kishan, Upendra Limaye, Anjali Anand, Sanjeeda Sheikh, Esha Gupta

Dhamaal 4

Comedy (Hindi)
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‘धमाल 4’ में मिलेगा कॉमेडी का खज़ाना…?

Sat, July 11 2026

2007 में आई पहली वाली ‘धमाल’ में गोआ के एक पार्क में ‘डब्ल्यू’ आकार में खड़े पेड़ों के नीचे खज़ाना दबा था। इस बार एक वीरान टापू में ‘एम’ आकार में खड़ी पहाड़ियों के नीचे खज़ाना है। खज़ाना भी किसका, सौ साल पहले एक डाकू शैतान सिंह का जो वह अंग्रेज़ों से लूटा करता था। अब इस खज़ाने को खोजने निकली हैं तीन टीमें-गुड्डू और जॉनी, आदि और मानव व आदि की पत्नी, लल्लन और उसकी पत्नी। साथ ही इनके पीछे पड़े हैं डाकू अधूरा और उसके साथी। इस सफर में हैं ढेरों मुसीबतें, उनसे बचने की कसरतें और इन सब की लल्लुआना हरकतें। ज़ाहिर है मकसद आपको हंसाना है, ठहाके लगवाना है। ‘धमाल’ सीरिज़ की फिल्में दर्शकों को किसी वीडियोगेम या कार्टून कॉमिक्स के भीतर ले जाती रही हैं। एक ऐसा संसार जहां फिज़िक्स-कैमिस्ट्री के नियमों की धज्जियां उड़ा कर उनसे हास्य उपजाया जाता है। किसी ने घर की घंटी बजाई और उससे आने वाले करंट ने बंदे का तंदूरी मुर्गा बना दिया या किसी के बम में चाकू घुसने के बावजूद खून न निकलना जैसे ये सीन हमें डोनाल्ड डक, मिकी माउस या टॉम एंड जैरी की दुनिया में ले जाते हैं। उनमें जो होता है वह कहीं से भी तार्किक नहीं लगता, लेकिन उसे देख कर आप हंसते हैं, ठहाके लगाते हैं, आपको मज़ा आता है और आपका दिल-दिमाग हल्का होता है। यह फिल्म भी आपको वही मज़ा देती है। बस, बच्चे बन जाइएगा इसे देखते हुए।

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Image of scene from the film Ikka
Director:Siddharth P. Malhotra
Cast:Sunny Deol, Akshaye Khanna, Tillotama Shome, Dia Mirza, Sanjeeda Sheikh, Jyoti Mukherji, Shishir Sharma, Akansha Ranjan Kapoor, Vijay Vikram Singh, Daria Bedi
Writer:Suparn Verma

Ikka

Drama, Thriller (Hindi)
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‘इक्का’ तो हल्का निकला

Fri, July 10 2026

‘इक्का’ समझते हैं न आप? ताश के खेल में सबसे अव्वल माना जाता है इसे। वकील अर्जुन मेहरा को लोग इक्का कहते हैं क्योंकि वह आज तक कोई केस नहीं हारा। और यह तब है जब वह हमेशा मासूमों के पक्ष में हक के लिए लड़ता है। लेकिन इस बार मामला अलग है। उद्योगपति नेता का बिगड़ैल बेटा शौर्यमन एक लड़की के मर्डर के मामले में फंसा है। अर्जुन को किसी मजबूरी के चलते यह केस लेना पड़ता है। आखिर क्या थी उसकी मजबूरी? और क्या अर्जुन इस बार गलत आदमी का साथ दे रहा है? क्या वह यह केस हारेगा या जीत कर इक्का बना रहेगा? देखने-सुनने में यह फिल्म (Ikka) एक थ्रिलरनुमा कोर्टरूम ड्रामा लग रही है। ऐसी फिल्मों में कहानी बताई नहीं, छुपाई जाती है। इसका ट्रेलर भी कुछ खास परतें नहीं खोल रहा है। खासतौर से अर्जुन की उस मजबूरी का ज़िक्र कहीं नहीं है जिसके चलते वह शौर्यमन गौड़ का केस लेता है। (फिल्म में सरनेम ‘गौर’ व ‘गौड़’ बोला गया है। भई ऐसा सरनेम रखते ही क्यों हो जिसे रोमन में पढ़ कर एक्टर ठीक से बोल ही न पाएं?) इस फिल्म को देखते समय लगता है कि स्क्रीन पर सब ठीक-ठाक चल रहा है। लेकिन बहुत जल्दी इस ठीक-ठाक के नीचे दबी कहानी का पिलपिलापन महसूस होने लगता है। फिल्म खत्म होते-होते काफी कुछ अधूरा-सा, बनावटी-सा, जबरन-सा महसूस होने लगता है। जब आप खुद से सवाल पूछते हैं कि यह जो देखा, इसमें गहराई कितनी थी तो अंदर से कोई ढंग का जवाब नहीं आता।

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Image of scene from the film Alpha
Director:Shiv Rawail
Cast:Alia Bhatt, Sharvari, Bobby Deol, Anil Kapoor, Dibyendu Bhattacharya, Dia Mirza, Hrithik Roshan

Alpha

Action, Thriller (Hindi)
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छोल्जर छोल्जर ‘ऐल्फा’ छोल्जर

Fri, July 3 2026

सबसे पहले – ‘मैं सीत्ता पर हाथ रख कर कसम खाता हूं कि इस फिल्म को देखते समय मैं अपने दिमाग में कोई सवाल नहीं आने दूंगा, ‘धुरंधर’ को बिल्कुल याद नहीं करूंगा और इस फिल्म को देखने के बाद मैं थिएटर की दीवारों पर सिर पटक-पटक कर अपनी जान भी नहीं दूंगा।’ चलिए अब आगे बढ़ते हैं। एक सीन देखिए – सर हमने मकान को चारों तरफ से घेर लिया है। ठीक है, लेकिन सीत्ता को आंच नहीं आणी चाहिए। इसके बाद वे बंदे चारों तरफ से उस लकड़ी के मकान पर सैंकड़ों गोलियां ऐसे बरसाते हैं जैसेकि सर के आदेश के बाद कोई गोली सीत्ता को छू भी न सकेगी। अरे बावलो, कुछ तो दिमाग लगाओ, सीत्ता अगर ऐन वक्त पर नीचे न बैठी होती तो तुम सर को क्या जवाब देते? हां तो साहेबान, मेहरबान, कद्रदान, बिछ गया है यशराज फिल्म्स का चमकीला दस्तरखान। और इस पर परोस दिया गया है भव्यता, रंगीनियत, चमक-दमक और चटकीलेपन में लिपटा वही पुराना खोखला सामान। ‘बॉलीवुड’ के सभी बड़े निर्माता अब यही तो कर रहे हैं। कंटेंट की जगह अब पैकेजिंग का ज़माना आ चुका है। दर्शकों को मूर्ख बनाना इतना आसान पहले कभी न था।

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