
Deepak Dua
Independent Film Journalist & Critic
Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.
A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra
All reviews by Deepak Dua

Ikkis
History, War, Drama (Hindi)
कुछ अलग-सी शौर्य कथा है ‘इक्कीस’
Thu, January 1 2026
1971 में जब भारत पूर्वी मोर्चे पर पाकिस्तान से जूझ रहा था तब पाकिस्तान ने भारत को उलझाने के लिए पश्चिमी सरहद पर भी मोर्चा खोल दिया था। उस दौरान लड़ी गई कई लड़ाइयों में से एक थी ‘बसंतर की लड़ाई’ जिसमें हमारे टैंक सवार वीरों ने पाकिस्तानी टैंकों को नेस्तनाबूद करते हुए असीम शौर्य का प्रदर्शन किया था। उन वीरों में से एक थे सैकिंड लेफ्टिनेंट अरुण खेत्रपाल जिन्होंने महज़ 21 साल की उम्र में अद्भुत वीरता दिखाते हुए अपने टैंक में आग लगने के बावजूद पीछे हटने से इंकार करते हुए पाकिस्तानी फौज को भारी नुकसान पहुंचाया था और देश के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया था। इस वीरता के लिए उन्हें मरणोपरांत परमवीर चक्र से सम्मानित किया गया था। इस सर्वोच्च सम्मान को पाने वाले वह सबसे युवा सैनिक थे। श्रीराम राघवन की यह फिल्म ‘इक्कीस’ (Ikkis) उसी 21 वर्षीय वीर अरुण खेत्रपाल की कहानी दिखाती है, थोड़े अलग ढंग से।

Tu Meri Main Tera Main Tera Tu Meri
Romance, Comedy (Hindi)
‘तू मेरी’ खिचड़ी ‘मैं तेरा’ दलिया
Thu, December 25 2025
इस रिव्यू का हैडिंग पढ़ कर यदि आप सोच रहे हों कि यह फिल्म खिचड़ी या दलिए की तरह पौष्टिक होगी और तो ज़रा रुकिए… पहले इस फिल्म ‘तू मेरी मैं तेरा मैं तेरा तू मेरी’ (TMMTMTTM) का पूरा रिव्यू पढ़ लीजिए, फिर फैसला कीजिएगा। अमेरिका में बस चुका एक बेहद अमीर लड़का दिल्ली से सीधे क्रोएशिया जा रहा है-घूमने, अकेले। न बिक पा रही किताबें लिख कर (पता नहीं कैसे) अमीर बन चुकी लड़की भी वहीं जा रही है-घूमने अकेले। अब किसी टूर पर दो अकेले मिलेंगे तो दुकेले हो ही जाएंगे न! तो बस, यहां भी वही हुआ। पहले रार, तकरार, फिर बिस्तर वाला और बाद में सच्चा प्यार। लेकिन बीच में आ गई मां-बाप की दीवार। दरअसल लड़के की मां को अमेरिका में रहना पसंद है और लड़की के बाप को आगरा में। अब लड़का जा पहुंचा है आगरा में अपनी सिमरन के बाऊ जी को पटाने। क्योंकि वह सिमरन ही क्या जो बाऊ जी की मर्ज़ी के बिना शादी कर ले और वह बाऊ जी ही क्या जो अंत में यह न कह दें-जा सिमरन जा, जी ले अपनी ज़िंदगी। दुर्र फिट्टे मुंह!

Kis Kisko Pyaar Karoon 2
Comedy, Romance, Drama (Hindi)
इस सर्कस में है टाइमपास कॉमेडी
Sat, December 13 2025
10 साल से ऊपर हो गए जब कॉमेडी के लिए चर्चित कपिल शर्मा बतौर हीरो अपनी पहली फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं’ लेकर आए थे। उस फिल्म में उन्होंने एक ऐसे युवक की भूमिका निभाई थी जिसे मजबूरी में तीन शादियां करनी पड़ती हैं और अब वह अपनी पसंद की लड़की से चौथा ब्याह रचाने जा रहा है। उस फिल्म में रोमांस की हल्की खुशबू के साथ कॉमेडी का तड़का था और दर्शकों ने उस फिल्म पर अपनी पसंदगी का ठप्पा भी लगाया था। यह फिल्म ‘किस किस को प्यार करूं 2’ उसी कड़ी की अगली फिल्म है। लेकिन यह उसका सीक्वेल नहीं है बल्कि लगभग उसी कहानी पर फिर से बनाई गई फिल्म है-कुछ अलग तड़के के साथ

Dhurandhar
Action, Thriller (Hindi)
ज़ख्मों का हिसाब लेने आया ‘धुरंधर’
Sat, December 6 2025
इस फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) का ट्रेलर देखिए तो पता चलता है कि एक युवक (जो भारतीय एजेंट हो सकता है), पाकिस्तान के लयारी टाऊन में पहुंचता है जिसके बाद बेहिसाब खून-खराबा शुरू हो जाता है क्योंकि भारत के खुफिया ब्यूरो के एक बड़े अफसर का कहना है-मुंह तोड़ने के लिए मुठ्ठी बंद करना ज़रूरी है। पर क्या आपने इससे पहले कभी लयारी के बारे में सुना था…? दरअसल पाकिस्तान की व्यावसायिक राजधानी कहे जाने वाले कराची शहर का एक बहुत पुराना और ऐतिहासिक इलाका है लयारी। इस इलाके की अहमियत इतनी है कि इसे ‘कराची की मां’ तक कहा जाता है। ऐसा इलाका जहां पख्तून, बलूच, सरायकी, सिंधी, कच्छी, मुहाजिर जैसी कई सारी कौमें मिल-ठन कर रहती हैं। कोई वक्त था जब यहां बलूचों और पख्तूनों (पठानों) में हमेशा तलवारें खिंची रहती थीं। दोनों के अपने-अपने गैंग थे जो अक्सर आपस में भिड़ते रहते थे। दोनों की सरपरस्त अपनी-अपनी राजनीतिक पार्टियां थीं। बलूच गैंग के सरदार रहमान डकैत (जी हां, यही नाम था उसका) के सिर पर पाकिस्तान की एक प्रमुख राजनीतिक पार्टी का हाथ था जिसके लिए रहमान लयारी में वोटों का इंतज़ाम करता था और बदले में अपने काले धंधे चलाता था। फिर एक वक्त आया जब खुद पाकिस्तान के राष्ट्रपति (जी हां, सही पढ़ा आपने, खुद वहां के राष्ट्रपति) ने रहमान डकैत को आशीर्वाद देकर उसकी एक अलग पॉलिटिकल पार्टी बनवा दी। धीरे-धीरे इन गैंग्स्टर लोगों का आतंक वहां इतना ज़्यादा बढ़ गया कि पहले 2012 और फिर 2013 में पाकिस्तानी सरकार ने इनके खिलाफ जंग छेड़ दी जिसे ‘ऑपरेशन लयारी’ कहा गया। यह फिल्म ‘धुरंधर’ (Dhurandhar) उसी ऑपरेशन के पीछे की कहानी दिखाती है, आगे की कहानी इस फिल्म के अगले पार्ट में दिखाई जाएगी जो मार्च, 2026 में रिलीज़ होगा।

Tere Ishk Mein
Romance, Drama, Action (Hindi)
रांझणा बनने चला ‘तेरे इश्क में’
Sat, November 29 2025
लड़की हाथ छुड़ा कर मुड़ी तो उसकी चूड़ी का कांच टूट कर लड़के को ज़ख्म दे गया। ऐसा ज़ख्म कि उसने शहर को फूंकना चाहा। लड़की किसी और से शादी करने चली तो वह उसे श्रॉप दे आया कि शंकर करे तुझे बेटा हो, तुझे भी पता चले कि इश्क में जो मर जाते हैं वो भी किसी के बेटे होते हैं। कहानी की यह झलक बताती है कि यह फिल्म हमें इश्क-मोहब्बत के उन दर्द भरे रास्तों पर ले जाने आई है जिसे देख कर आशिकों के दिल तड़पते हैं और जिन्होंने कभी प्यार न किया हो वे सुकून महसूस करते हैं। फिल्मकार आनंद एल. राय की ‘रांझणा’ भी तो ऐसी ही फिल्म थी जिसमें मुरारी ने कुंदन से कहा था-मर जाओ पंडित। पंडित उस फिल्म में इश्क करते हुए मरा तो इस फिल्म में भी वही रूप धर कर आ गया। वैसे भी सभी दिलजले, बर्बाद आशिकों की सूरत एक जैसी ही हो जाती है।

Gustaakh Ishq
Romance, Drama (Hindi)
जाड़ों की नर्म धूप-सा
Fri, November 28 2025
1998 का वक्त। पुरानी दिल्ली में बंद होने के कगार पर खड़ी अपनी प्रिंटिंग प्रैस को बचाने के लिए नवाबुद्दीन रिज़वी जा पहुंचा है पंजाब के मलेरकोटला में शायर अज़ीज़ बेग के पास। सुना है किसी ज़माने में अज़ीज़ मियां मुशायरे लूट लिया करते थे। लेकिन एक ज़ख्म मिला और उन्होंने लिखना ही छोड़ दिया। उनके कलाम भी कभी छप न सके, या कहें कि उन्होंने छपवाए ही नहीं। नवाब चाहता है कि अज़ीज़ साहब उसे अपनी शायरी दे दें। सीधे नहीं कह सकता, सो उनकी शागिर्दी में शायरी सीखने लगता है। लेकिन अज़ीज़ बेग का कहना है कि वो फनकार ही क्या जिसे अव्वल कहलाने के लिए खुद पर बाज़ार की मुहर लगवानी पड़े। इधर अज़ीज़ साहब की शागिर्दी करते हुए उनकी बेटी मन्नत और नवाब का इश्क परवान चढ़ रहा है तो उधर दिल्ली में तंगहाल मुंह बाए खड़ी है। क्या बच पाएगी नवाब की प्रिंटिंग प्रेस? क्या अज़ीज़ बेग अपने कलाम छपवाने पर राज़ी हो जाएंगे? आखिर लिखना क्यों छोड़ा था उन्होंने? क्या नवाब का झूठ पकड़ा जाएगा? मन्नत और नवाब का इश्क मुकम्मल होगा या…!

120 Bahadur
Action, War (Hindi)
मिट्टी पर मिटने वालों की अमिट कहानी
Fri, November 21 2025
1962 का समय। हिन्दी-चीनी भाई-भाई के नारे को ठोकर मारते हुए चीन ने भारत की पीठ में खंजर भोंका था। उसी युद्ध में 18 नवंबर, 1962 को लद्दाख के रेज़ांग ला में एक ऐसी अनोखी लड़ाई लड़ी गई थी जिसमें 120 वीर सिपाहियों की चार्ली कंपनी ने मेजर शैतान सिंह की अगुआई में तीन हज़ार चीनी सैनिकों से भिड़ते हुए उन्हें पीछे हटने पर मजबूर कर दिया था। उस लड़ाई में मात्र 6 सैनिक जीवित बचे थे और मेजर शैतान सिंह समेत बाकी वीरों ने मौत को गले लगाया था। बाद में मेजर शैतान सिंह को मरणोपरांत परमवीर चक्र और उनके सिपाहियों में से आठ को वीर चक्र, एक को अति विशिष्ट सेवा मैडल, चार को सेना पदक व अन्य सम्मान दिए गए। अगर उस दिन ये लोग वहां डट कर नहीं रहते तो चीन भारत में काफी अंदर तक कब्ज़ा कर चुका होता। उन्हीं वीर अहीर सिपाहियों और राजपूत मेजर शैतान सिंह भाटी के अदम्य साहस को सलाम करती है निर्माता फरहान अख्तर की यह फिल्म ‘120 बहादुर’। फरहान अख्तर इसके लिए प्रशंसा के हकदार हैं।

De De Pyaar De 2
Comedy, Romance (Hindi)
रिश्तों का एक और रंगीन पंचनामा
Sat, November 15 2025
साढ़े छह बरस पहले आई ‘दे दे प्यार दे’ में 50 बरस के अधेड़ आशीष को 26 बरस की कमसिन आयशा से प्यार हुआ था मगर बीच में आ गए थे आशीष के बीवी-बच्चे जिनसे वह 18 साल पहले अलग हो गया था। आशीष बेचारा असमंजस में फंस गया था कि पुराने रिश्ते निभाए या नए रिश्ते को थामे। लेकिन अंत में सब सुलझ गया था। क्या वाकई…! पहले आशीष आयशा को अपने परिवार से मिलवाने ले गया था और इस बार आयशा उसे अपने घर लाई है अपने परिवार से मिलवाने। यहां बात-बात पर खुद को ‘प्रगतिशील, पढ़े-लिखे, आधुनिक’ कहलवाने वाले उसके माता-पिता हैं जो आशीष से साल-डेढ़ साल ही बड़े हैं। भाई, भाभी, मासी, कज़िन, नानी, भाभी के माता-पिता वगैरह भी हैं। ऐसे में अपने पिता की उम्र के आशीष को वह कैसे सबसे मिलवाए, कैसे यह बताए कि हम दोनों शादी करने वाले हैं…? लेकिन जैसा कि फिल्मों में होता है, अंत में सब सुलझ जाता है। क्या वाकई…!
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