
Deepak Dua
Independent Film Journalist & Critic
Deepak Dua is a Hindi Film Critic honored with the National Award for Best Film Critic. An independent Film Journalist since 1993, who was associated with Hindi Film Monthly Chitralekha and Filmi Kaliyan for a long time. The review of the film Dangal written by him is being taught in the Hindi textbooks of class 8 and review of the film Poorna in class 7 as a chapter in many schools of the country.
A chapter on ‘Film Journalism’ written by him is included in the curriculum of ‘Uttarakhand Open University’. Apart from his regular writing on cinema (and tourism) for many Hindi newspapers, magazines, web-portals in India and abroad, he also appears on various radio and television channels. His film reviews can be found on CineYatra
All reviews by Deepak Dua

Bhooth Bangla
Horror, Comedy (Hindi)
खोखली ईंटों से बना ‘भूत बंगला’
Fri, April 17 2026
मंगल पुर रेलवे स्टेशन पर ट्रेन के इंतज़ार में बैठे चार युवकों को एक बाबा कहानी सुना रहा है कि कुछ साल पहले यहां शादियां नहीं हुआ करती थीं क्योंकि वधूसुर नामक राक्षस वधुओं को उठा लेता था। फ्लैश बैक में कहानी दिखने लगती है जिसमें लंदन में रहने वाला (अक्षय कुमार) अपने दादा की वसीयत से मिले महल में मंगलपुर आया है ताकि अपनी बहन की शादी यहां कर सके। इसके लिए वेडिंग प्लानर (परेश रावल), उसके सहयोगी, महल का मैनेजर (असरानी), नौकर-चाकर भी यहां हैं। एक राक्षस भी है, उससे भिड़ने के लिए गुरु जी और उनका चेला है। हीरो की बहन आती है, उसके ससुराल वाले, ज्योतिषी, और भी कई सारे लोग। एक हीरोइन भी बीच-बीच में आती-जाती रहती है। ज़ाहिर है कि इस भीड़भाड़ में कॉमेडी, डर, रोमांच, रोमांस जैसे रस निकलते-बहते रहते हैं।

Matka King
Drama, Crime (Hindi)
अपनी छवि चमकाने आया ‘मटका किंग’
Fri, April 17 2026
50 के दशक में मुंबई की कपड़ा मिलों के इलाके में काम करने वाले रतन खत्री ने देखा कि कल्याणजी भगत नाम का एक आदमी न्यूयॉर्क कॉटन एक्सचैंज में कपास के चढ़ते-गिरते भावों पर लोगों से सट्टा लगवाता है। तब रतन खत्री ने एक नया खेल शुरू किया। जुए के इस खेल को रोचक बनाते हुए वह एक मटके में ताश के पत्ते डाल कर सबके सामने निकालता और जीतने वालों को तुरंत पैसे देता। कुछ ही सालों में उसका यह खेल ‘मटका’ पूरे देश में फैल गया। एक दिन में एक करोड़ रुपए तक का सट्टा लगने लगा और लोग उसे ‘मटका किंग’ तक कहने लगे। बाद में वह फिल्म निर्माण में भी घुसा। 1975 में इमरजैंसी लगी तो उसे जेल में भी डाला गया। वहां से छूट कर उसने फिर यह काम शुरू कर दिया और 90 के दशक तक सक्रिय रहा। 2020 में रतन खत्री की मृत्यु हुई।

Toh Ti Ani Fuji
Romance, Drama (Marathi)
सधी, संभली प्रेम कहानी ‘मैं वो और फुजी’
Sat, April 11 2026
जापान के फुजी पर्वत को नखरे वाला पर्वत माना जाता है। कभी यह मीलों दूर से भी दिख जाता है तो कभी पास से भी नज़र नहीं आता है। ज़्यादातर तो यह बादलों में ही छिपा रहता है और कभी अचानक से मन मोहने वाली अदाएं बिखेरने लगता है। हालांकि यह सवा तीन सौ साल पहले आखिरी बार फटा था लेकिन आज भी इसे एक जीवित ज्वालामुखी माना जाता है। इस फिल्म में फुजी का क्या किरदार है, यह आगे समझेंगे लेकिन पहले यह जान लीजिए कि सोनीलिव पर आई यह एक मराठी फिल्म है जिसका मूल नाम ‘तो ती आणि फुजी’ (Toh Ti Ani Fuji) (मैं वो और फुजी Main Woh Aur Fuji) है और यह मराठी के साथ-साथ हिन्दी में भी देखी जा सकती है।

Dhurandhar: The Revenge
Action, Crime, Thriller (Hindi)
अब ज़ख्म देने आया ‘धुरंधर’ (2)
Thu, March 19 2026
‘धुरंधर’ दरअसल सवा सात घंटे की फिल्म है जिसका साढ़े तीन घंटे का हिस्सा 5 दिसंबर, 2025 को आया था और अब पौने चार घंटे का यह पार्ट रिलीज़ हुआ है जिसका नाम ‘धुरंधर-द रिवेंज’ (Dhurandhar The Revenge) है। ‘रिवेंज’ यानी बदला। कह सकते हैं कि ‘धुरंधर’ इंटरवल से पहले की फिल्म थी जिसमें भारत का एक एजेंट पाकिस्तान के सिस्टम में घुस रहा था और भारत को दिए जा रहे ज़ख्मों का हिसाब इक्ट्ठा कर रहा था। अब इंटरवल के बाद की इस फिल्म ‘धुरंधर-द रिवेंज’ में वह एजेंट हिसाब चुकता कर रहा है, ज़ख्म दे रहा है। आगे बढ़ने से पहले यह भी साफ हो जाए कि यदि आपने पिछली वाली ‘घुरंघर’ नहीं देखी है तो न तो आपको यह वाली ‘धुरंधर-द रिवेंज’ (Dhurandhar The Revenge) देखनी चाहिए और न ही यह रिव्यू आगे पढ़ना चाहिए। कुछ समझ ही नहीं आएगा तो क्या ही फायदा।

Subedaar
Action, Crime, Drama (Hindi)
फिल्मी ‘सूबेदार’ बड़ा रिस्की
Thu, March 5 2026
‘प्रहार’ में मेजर चव्हाण बने नाना पाटेकर मुंबई में हफ्ता वसूलने और आम आदमियों को आतंकित करने वाले गुंडों को मारने के बाद कोर्ट में कहते हैं-‘आर्मी में हमें सिखाया जाता है देश के लिए लड़ना… अगर लड़ाई के मैदान बदल जाते हैं तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं…?’ इस फिल्म ‘सूबेदार’ (Subedaar) का सूबेदार अर्जुन मौर्य भी यही कर रहा है। पत्नी की असमय मौत के बाद फौज से रिटायर होकर आए अर्जुन की अपनी जवान बेटी श्यामा से नहीं बन रही है। बन तो असल में उसकी किसी से भी नहीं रही है। फौज की ज़िंदगी से अलग अपने शहर के जंगलराज की अव्यवस्थाओं और मनमानियों को वह चुप्पी से झेले जा रहा है। शहर में बालू माफिया बबली दीदी का राज है। बबली का भाई प्रिंस सूबेदार को उकसाता है तो वह भिड़ जाता है। उधर श्यामा अलग ही उलझी पड़ी है।

Kennedy
Crime, Thriller (Hindi)
अंधेरी रातों में सुनसान राहों पर ‘कैनेडी’
Fri, February 20 2026
‘हम कवि अपनी जवानी की शुरुआत खुशी से करते हैं, लेकिन आखिर में निराशा और पागलपन आ जाता है।’ इंगलिश कवि विलियम वर्ड्सवर्थ की इन पंक्तियों से शुरू होने वाली अनुराग कश्यप की फिल्म ‘कैनेडी’ बहुत जल्द इन पंक्तियों के अर्थ को बयान करने में लग जाती है। 2020-21 की कोरोना महामारी के समय में स्थित इस फिल्म ‘कैनेडी’ (Kennedy) का केंद्रीय पात्र कैनेडी कभी एक पुलिस वाला उदय शैट्टी हुआ करता था जो शहर के भ्रष्ट पुलिस कमिश्नर की टीम में था। अब भी वह कमिश्नर के कहने पर लोगों को मार रहा है, उनसे उगाही कर रहा है। लेकिन जिस काम को कभी वह खुशी से करता था अब उसी को निराशा और पागलपन से कर रहा है। सिर्फ कुछ रातों की इस कहानी की शुरुआत में ही उदय शैट्टी बता देता है कि पिछले छह सालों में उसने अनगिनत लोगों को मारा है। धीरे-धीरे आगे बढ़ते हुए यह फिल्म बीच-बीच में फ्लैश बैक में भी जाती है और तब समझ आता है कि जिस बहुत उलझे हुए कथानक के बीच हम फंसे पड़े हैं, उसके धागे असल में कहां तक फैले हुए हैं।

O'Romeo
Crime, Drama, Action (Hindi)
‘ओ रोमियो’ प्यार न करियो…
Sat, February 14 2026
नब्बे के दशक में जब मुंबई अंडरवर्ल्ड पर दाउद की डी कंपनी का राज था तो उसका एक विरोधी था हुसैन उस्तरा। इसी हुसैन उस्तरा ने अशरफ खान नाम की उस औरत को बढ़ावा दिया था जिसके पति को दाउद के कहने पर मारा गया। अपने पति के कत्ल का बदला लेने के लिए अशरफ बन गई थी सपना दीदी और उसने उस्तरा के साथ मिल कर दाउद को शारजाह के स्टेडियम में टपकाने का प्लान भी बना डाला था। लेकिन ऐसा हो न सका और डी कंपनी ने पहले सपना को टपकाया, फिर उस्तरा को। मुंबई अंडरवर्ल्ड को करीब से जानने वाले पत्रकार हुसैन ज़ैदी की किताब ‘माफिया क्वीन्स ऑफ मुंबई’ के सपना दीदी पर लिखे अध्याय पर आधारित विशाल भारद्वाज की यह फिल्म ‘ओ रोमियो’ (O’ Romeo) सपना और उस्तरा की कहानी को कुछ अलग नज़रिए से देखती है, कुछ अलग ढंग से दिखाती है।

Vadh 2
Crime, Drama, Thriller (Hindi)
जेल के अंदर ‘वध 2’ का रहस्य
Sat, February 7 2026
किसी निर्दोष को मारना हत्या कहलाता है और किसी अत्याचारी या दुष्ट को मारना वध। लेकिन कानून की नज़र में तो हर हत्यारा दोषी ही होगा न? और किसी को जान से मारा जाए तो वह हत्या होगी या वध यह कौन तय करेगा? 2022 में आई ‘वध’ में एक अधेड़ दंपती ने अपने घर में घुस कर उन्हें परेशान करने वाले दबंग का ‘वध’ किया था। अब ‘वध 2’ (Vadh 2) में मामला घर के अंदर का नहीं, जेल के अंदर का है। मंजू सिंह 28 बरस से जेल में बंद है। अब उसकी रिहाई होने वाली है। जल्द रिटायर होने वाले जेल के एक सिपाही शंभूनाथ मिश्रा के साथ उसका दोस्ताना है। जेल में बंद एक दबंग से हर कोई परेशान है। एक दिन वह गायब हो जाता है। कहां गया वह? क्या उसे मार दिया गया? उसकी लाश कहां गई? मिली या नहीं? मिली तो कहां, कैसे? और यह हत्या थी या वध? किसने मारा उसे? कैसे मारा?
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